शायद... तुम्हें पता हो

Posted 3/14/2019
हुई मुद्दत
कि वक़्त थम गया 
और छोड़ गया तुम्हारा अक्स
मेरे चेहरे के सामने 
मेरी बंद आँखों में...

इस अक्स के पीछे का चेहरा 
हँसता मुस्कराता बातें करता 
सीधे मेरी आँखों में देखता...
अब नहीं दिखाई देता 
वो आवाज़ अब सुनाई नहीं देती 
हाँ पर... 
अब भी कभी कभी 
मेरी हथेली पर पसीने की
एक हलकी सी पर्त का एहसास होता है
वो पसीना आज भी 
दो हाथों का मालूम होता है 
दोस्त शायद ...
तुम्हें पता हो